इस आर्टिकल में नोहर के भामाशाह सेठ स्व. श्री गौरीशंकर बिहाणी के बारे में चर्चा की गई है। सेठ स्व. श्री गौरीशंकर बिहाणी का नोहर क्षेत्र के विकास में बहुत बड़ा योगदान रहा है जिसे नोहर वासी कभी नहीं भुला सकते हैं।
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| नोहर के भामाशाह : स्व. श्री गौरीशंकर बिहाणी |
स्व. श्री गौरीशंकर बिहाणी : समाजसेवी एवं भामाशाह
| जन्म | 7 मार्च 1916 को नोहर में |
| देहावसान | 21 जुलाई 1990 |
| बचपन | कलकता में बीता |
| दादा का नाम | हरगोपाल बिहाणी |
| पिता का नाम | बालकृष्ण बिहाणी |
| माता का नाम | जमना देवी |
| पत्नी का नाम | नर्मदा देवी |
| प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा (मैट्रिक) | माहेश्वरी विद्यालय, बड़ा बाजार कोलकाता |
| उच्च शिक्षा (कॉमर्स विषय से) | प्रेसीडेंसी कॉलेज, कोलकाता |
| व्यवसाय | • ‘मैर्सस गौरीशंकर बिहाणी’ नाम से आयरन (लोहे) का व्यवसाय 1933 में शुरू किया। |
| • टाटा स्टील के डीलर | |
| • लोहे का गवर्नमेंट अप्रूव्ड स्टॉकिस्ट | |
| • बिहाणी फर्म टाटा स्टील का पूरे भारत में सबसे पुराना और सबसे बड़ा स्टॉकिस्ट है। | |
| • 1947 में प्लाष्टिक व्यवसाय से जुड़े। जिसका नाम “मैर्सस सेंथेटिक मोल्डर्स लिमिटेड” रखा गया। | |
| ट्रस्ट | गौरी शंकर बिहानी चैरिटेबल ट्रस्ट एवं नर्बदा देवी बिहानी चैरिटेबल ट्रस्ट |
| नोहर में विकास कार्य | 1. बिहाणी जल प्रदाय योजना |
| 2. नर्बदा देवी बिहानी महाविधालय | |
| 3. अतिथियों के लिए बिहाणी धर्मशाला एवं विश्राम गृह | |
| 4. बालकृष्ण बिहाणी खेल स्टेडियम | |
| 5. गौरीशंकर बिहानी राजकीय कन्या महाविद्यालय |
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